घनी धूप में ठंडी छांव महसूस करके तो देखो।
जिन्दगी बहुत खुबसूरत है जरा नजदीक से देखो।
कभी शबनम भी जला देती है कभी आग मजा देती है।
ये जिन्दगी है दोस्त एक पल में हंसा देती है , तो कभी आसुओं की झडी लगा देती है।
बहार मे भी पतझड़ के वीराने देखे हैं यहां शमा के लिए जलते परवाने देखे हैं यहां।
अफ़सोस न कर की हर लम्हा रुला देता है वही तो है जो गम मे भी जीना सिखा देता है।
किसी ने जन्नत को देखा नहीं यहां फिर क्यों तू जहन्नुम की सोच से डरता है।
हर पल को गुजार दे यूँ की वीराने में भी बहार आ जाए।
बस याद रह जाए तेरा जीना इस जहाँ को , क्या पता तुझे देख के किसी उदास चेहरे पे मुस्कान छा जाए।
कोई मयखाने मे गम बेंचकर खुशी तलाशता है , जो अलमस्त फकीर है जिन्दगी का वो सिर्फ़ मुस्कान बाटता है।
सागर की लहरों सी मौजें उठती हैं तराने भी अफसाने हो जाते हैं।
लहर उठती है और बहाकर साथ ले जाती है , अपने भी यहाँ बेगाने हो जाते हैं।
इस लहर की ताल को महसूस तो कर फिर देख जिन्दगी के हर तराने पे नम तेरा है और फसाने भी कैसे तेरे अफसाने हो जाते हैं।



